सदर अस्पताल में खुले में मिला मेडिकल कचरा, जेएचआरसी ने जिला प्रशासन पर उठाए सवाल
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जमशेदपुर, 7 अक्टूबर 2026। एमजीएम अस्पताल के बाद अब सदर अस्पताल में भी मेडिकल कचरे के खुले में बिखरे होने और उसके उचित निस्तारण में लापरवाही का मामला सामने आया है। इसको लेकर झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस (जेएचआरसी) ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जेएचआरसी के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सदर अस्पताल का निरीक्षण किया और सिविल सर्जन डॉ. शाहिद पाल को ज्ञापन सौंपा।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में सामान्य कचरे के साथ मेडिकल कचरा भी खुले में जमीन पर बिखरा पाया गया। मौके पर गाय और कुत्ते कचरे में मुंह मारते नजर आए। जेएचआरसी ने कहा कि दो दिन पूर्व एमजीएम अस्पताल में भी मेडिकल कचरे के बीच कुत्तों के घूमने और कचरे में मुंह मारने का मामला सामने आया था।
मनोज मिश्रा ने कहा कि फरवरी 2026 में झारखंड हाई कोर्ट द्वारा मेडिकल कचरे के वैज्ञानिक और नियमानुसार निस्तारण को लेकर आदेश एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद सात माह बाद भी सरकारी अस्पतालों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाई कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी को दर्शाता है।
जेएचआरसी के अनुसार, सिविल सर्जन से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के उक्त आदेश की जानकारी नहीं है। इस पर मनोज मिश्रा ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारियों को न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं है और सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कचरा खुले में पड़ा है, तो आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सिविल सर्जन को सौंपे गए ज्ञापन में जेएचआरसी ने मांग की कि क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के समय बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुपालन की जांच अनिवार्य की जाए। इसके अलावा 30 बेड वाले अस्पतालों में मॉनिटरिंग कमिटी तथा 30 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों में नोडल ऑफिसर की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
संगठन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं को लागू करने के लिए 30 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन सात माह बीतने के बाद भी इसके अनुपालन को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मनोज मिश्रा ने कहा कि मेडिकल कचरे का गलत तरीके से निस्तारण मरीजों, अस्पताल कर्मियों और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
जेएचआरसी ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को एक माह का अल्टीमेटम देते हुए मेडिकल कचरे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने, क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन एवं रिन्यूअल में नियमों के अनुपालन की जांच करने तथा मॉनिटरिंग कमिटी और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति सहित हाई कोर्ट के निर्देशों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने की मांग की है।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर स्थिति में ठोस सुधार नहीं हुआ तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन सहित चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही न्यायालय के समक्ष अवमानना का मामला दायर करने की बात कही गई है।
मनोज मिश्रा ने कहा कि जनस्वास्थ्य और मानवाधिकारों के मुद्दे पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
प्रतिनिधिमंडल में मनोज बिखरा मेडिकल कचरा, जेएचआरसी ने दिया एक माह का अल्टीमेटम”।