मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट प्रकरण में आया नया मोड़ : आरोपी के अधिवक्ता ने खड़े किए सवाल
जमशेदपुर : मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट के संचालक अरोपी हरपाल सिंह थापर के अधिवक्ता ने दुष्कर्म के मामले को झूठा और बनावटी करार दिया है। बचाव पक्ष के सीनियर अधिवक्ता विमल पांडेय ने कहा है कि यह मामला पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियाद प्रतीत होता है। मामले की जड कहीं न कहीं से जमीन विवाद की तरफ इशारा कर रही है। जिसकी कीमत करोडों में बताई जा रही है। अधिवक्ता विमल पांडेय ने कहा कि लडकी का जैक बोर्ड के नौवीं कक्षा का सर्टिफिकेट झारखंड सरकार की बेबसाइट पर जाकर कोई भी जांच कर सकता है। इस सर्टिफिकेट को जांचने के बाद यह पता चला है कि लडकी बालिग है। किंतु पुलिस दवारा प्राथमिकी में उसे 17 साल का बताकर नाबालिग दिखाते हुए मामले को गंभीर बनाया गया। सीनयिर अधिवक्ता पांडेय ने कहा कि मामला दर्ज होते ही जिस तरह से पुलिस सक्रिय हुई और उसकी भूमिका नजर आई उससे साजिश कहा जाना भी गलत नही होगा। अधिवक्ता विमल पांडे ने कहा कि धराओं का गलत इस्तेमाल भी होता है। ये सभी जानते है क्योंकि कई झूठे मामले आज भी थानों में लंबित पडे हैं। तथा कई झूठे मामलों में लोग कोर्ट से बरी भी हो चुके हैं। इस मामले में भी कहीं न कहीं साजिश की बदबू आ रही है। अधिवक्ता विमल पांडेय ने कहा कि आखिर पुलिस को क्या जरूरत पडी थी। जो उसने लडकी के कागजात जांचे बिना उसे नाबालिग दिखाकर प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल गीता कौर और आदित्य सिंह की बात करें तो मेरे विचार से कोई भी मां और बेटा ऐसा नहीं होगा जो किसी युवती के शौषण करने में इस तरह से शामिल होगा।
सीनियर अधिवक्ता विमल पांडेय ने चीफ ज्यूडिशल जज के सामने प्राथमिकी दर्ज कराने वाली कथित नाबालिग लडकी दवारा अपने खून से लिखे लेटर को पेश किया। यह लेटर उसने अपने प्रेमी राहुल के नाम लिखा था। लेटर में इस बात का जिक्र था कि मदर टेरेसा ट्रस्ट के संचालकों के चलते ही वो अपने प्रेमी राहुल से नहीं मिल पाती तथा उसका हाॅस्टल से बाहर निकलना भी बहुत मुश्किल है।
