रांची में छऊ कला की गूंज, गुरु तपन कुमार पटनायक ने साझा की परंपरा और संस्कृति की विरासत
1 min read
रांची: झारखंड की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित “प्रातः स्मरण” कार्यक्रम में रविवार को रांची के ऑडिटोरियम सभागार में छऊ कला एवं नाट्य परंपरा पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में सरायकेला छऊ शैली के वरिष्ठ गुरु एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार गुरु तपन कुमार पटनायक ने छऊ नृत्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, तकनीकी विशेषताओं और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।गुरु तपन कुमार पटनायक ने व्यावहारिक प्रस्तुति के माध्यम से छऊ नृत्य की विशिष्ट शारीरिक मुद्राओं, मुखौटों की भूमिका और इसकी कलात्मक बारीकियों को दर्शकों के समक्ष जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि लोक जीवन, प्रकृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने महिषासुर वध, रामायण, महाभारत, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और जन-जागरूकता जैसे विषयों पर आधारित छऊ प्रस्तुतियों का उल्लेख करते हुए इसकी सामाजिक उपयोगिता और समकालीन प्रासंगिकता पर भी चर्चा की।कार्यक्रम में नाटक एवं लोक कला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन पर बल देते हुए नई पीढ़ी को लोक कलाओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कलाकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। आयोजन का उद्देश्य भारतीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करना था।
