आनेवाली पीढ़ी के लिए दर्द भरी रहेगी मूर्ति की कारीगरी : मूर्तिकार
जमशेदपुर : मूर्तिकार का दर्द ,कहा 60 वर्षो से मूर्ति बनाने का काम कर रहे मगर आ रही आर्थिक परेशानी के बाद आने वाली पीढ़ी त्याग देगी मूर्ति कारीगिरी। कहा कोरोना काल की मार के बाद सरकारी गाईडलाईन ने तोड़ी कमर अब बस,,, झांकने भी नही आता है। माँ दुर्गा को आगमन को लगभग 10 दिन बचा है। शक्ति की पूजा के लिए मूर्तिकारों ने बंगाल की मिट्टी ला अपने रोजगार मूर्ति निर्माण में जोरो से जुटे है जहा साँचे में माता का मुखोटा बन रहा है तो कही कारीगर मिट्टी के कार्य को जल्द समाप्त कराना चाहते है कारण लगातार वर्षा के कारण मूर्ति का सुखाना भी बाकी है ताकि समय पर मूर्ति को मूर्तिकार अंतिम रूप दे सके। यू तो जमशेदपुर में कई स्थानों पर मा दुर्गा की मूर्ति बनाई जाती है कारण लौहनगरी में लाइसेंसी पूजा लगभग 300 है और इसके अलावा कई पूजा पंडाल बनाता रहा है जहा माता की पूजा की जाती रही है मगर इस बार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए पूर्ण आज़ादी पूजा आयोजन को सरकार की तरफ से नही मिली है। इस बार कई पाबंधियो के साथ पूजा होना है जिसे 100 से ऊपर भीड़ नही लगानी है,5 फिट तक कि ही मूर्ति स्थापित करना और भोग वितरण पर भी रोक लगाया गया है । इसी बीच मूर्तिकार ज्यादा से ज्यादा कारीगर लगा अपने ऑडर की मूर्तियां बनाने में जुटे है जो अपना दर्द व्या करते हुए बताते है इन मुश्किलों में कितनी मेहनत करते है वह और कमाई शून्य रहता है । जिससे अब इस मूर्ति कारीगरी को नफरत की नजर से देखते हुए कहते हैं पिछले 60 वर्षों से हम इस पेशे में है मगर अब इस पेशे को आगे ले जाना बहुत मुश्किल है यही हाल रहा तो आगामी पीढ़ी इस पेशे को 100 प्रतिशत त्याग देगी।