हेमंत सरकार बिहारियों के लिए डैम का फाटक खोल देती है और टुसू पर बैन लगाती है यह ठीक नहीं : दुलाल भुइयाँ
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जमशेदपुर : राज्य के पूर्व मंत्री और झामुमो नेता दुलाल भुइयां ने पर्व-त्योहार में लगायी गयी पाबंदियों को लेकर अपनी ही सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री दुलाल ने कहा कि सरकार की पाबंदियों के कारण यहां के आदिवासियों-मूलवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। दुलाल ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीति एक आंख में काजल और एक आंख में सुरमा वाली है। एक तरफ सरकार बिहारियों के लिए डैम का फाटक खोल देती है. छठ पर्व पर एक-एक अफसर नदियों की सफाई में लग जाता है, लेकिन झारखंडी लोगों का अपना राजपाट होने के बावजूद झारखंडी लोगों का इतिहास खत्म किया जा रहा है। छठ में सफाई और सरहुल-सोहराई पर नदी में गंदगी का अंबार
मकर संक्रांति और टुसू पर्व पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत लगायी गयी पाबंदियों को लेकर नाराज पूर्व मंत्री दुलाल ने कहा कि यहां के आदिवासियों-मूलवासियों का सबसे बड़ा पर्व टुसू है। यह कुवांरी लड़कियों का त्योहार है, लेकिन इसपर प्रतिबंध लगा दिया जाता है. वहीं छठ पर्व पर भीड़ पर भीड़ जुटाने की अनुमति दे दी जाती है। उन्होंने आदिवासियों- मूलवासियों के साथ दोहरा बर्ताव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरहुल, माहे, सोहराय, करमा, टुसू, मकर और मंगला पूजा जैसे स्थानीय पर्व भी नदियों से जड़े हुए हैं। लेकिन इन अवसरों में नदी में गंदगी का अंबार छोड़ दिया जाता है। दुलाल भुइयां ने शुक्रवार को अपने आवास पर अपने परिजनों के साथ टुसू पर्व मनाया और पारंपरिक मांदर भी बजाया। हालांकि पर्व का वह उत्साह और लोगों की वह भीड़ नजर नहीं आयी, जिसके लिए टुसू पर्व जाना जाता है। यही कारण है, कि पूर्व मंत्री सरकार के फैसले से खफा दिखे।