चांडिल में दुर्गा पूजा के बाद निभाई गई वर्षों पुरानी परंपरा, नदी से निकाला गया मां का पाटा
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चांडिल/जमशेदपुर: दुर्गा पूजा विसर्जन के बाद चांडिल में वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया गया। प्रतिमा विसर्जन के बाद नदी से मां दुर्गा की प्रतिमा का पाटा निकाला गया। स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस लकड़ी के पाटे को सुरक्षित रखकर पूरे वर्ष पूजा-अर्चना की जाती है।जानकारी के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा इसी पाटे पर स्थापित की जाती है। विसर्जन के बाद प्रतिमा से अलग हुए पाटे को नदी से निकालकर सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद श्रद्धालु सालभर इसकी पूजा करते हैं।चांडिल की यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। दुर्गा पूजा संपन्न होने के बाद भी पाटे की पूजा के माध्यम से श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा का सिलसिला जारी रहता है। स्थानीय स्तर पर इस परंपरा को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।