जज्बा : बिना गुरु के ही अपनी चित्रकारी का लोहा मनवा रहें है अर्जुन दास रतन टाटा, अभिताभ बच्चन समेत कई दिग्गजों की चित्रकारी कर भेंट कर चुके है
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जमशेदपुर : चित्रकार तो कई मगर सातों रंगे से खेलने वाले सातों सुर की तरह सभी टाइप का चित्रांकन करना गॉड- गिप्ट से कम नही वह भी अंग राज कर्ण की तरह बिना गुरु के ही अदभुत मनमोहक पेंटिंग। जिसका पेंटिंग देश ही नही बिदेशो में भी होता है डिमांड। जिनका मनना है मेरा वजूद किसी नॉकरी से कम नही पेंटिंग ही मेरा जीवन है इस लिए जीवन मे समझौता नही। 6 वर्ष की उम्र में कागज पर 12 वर्ष के हुए तो दीवारों पर और 22 वर्ष के हुए कैनवास पर जीवंत पेंटिंग की प्रतिभा देश नही विदेशों में जमशेदपुर की प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। यह है अर्जुन दास जो दूसरों की पेंटिंग देख मात्र पेंटिंग बनाना सुरु किया और आज शहर के चौक चौराहा से लेकर कई स्थानों पर इनकी पेंटिंग बोलती हैं। जहा घर मे एकाग्र मन से अपनी पेंटिंग बनाते है जो अमिताभ बच्चन से लेकर रतन टाटा तक कि पेंटिंग बना उनको भेट कर चुके है जो उनसे मिल अपना फ़ोटो तक खिंचवा चुके है जो बताते है आज उन्हें कोई नॉकरी की जरूरत नही उनकी पेंटिंग लाखो लाख में बिदेशो में बिकती है जहा आज के दौर में ऑन लाइन डिमांड कैलोफोनिया और अन्य देशों से है बस एक ही उद्देश्य है पूरी दुनिया उनको उनके पेंटिंग के जरिये जाने।

