ऐतिहासिक मुडमा जतरा स्थल पर दूसरे समुदाय द्वारा अतिक्रमण के विरोध में हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे आदिवासी समाज, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
राँची: ऐतिहासिक पाडहा जतरा खूँटा शक्ति स्थल मुडमा की पवित्र भूमि को झारखंड सरकार आदिवासियों के धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में चिन्हित कर पूजा परिक्रमा करने वाले रास्ते की सुंदरीकरण का कार्य करायी जा रही है, जिसे मोहर्रम जुलूस का स्थान बताकर सुंदरीकरण के कार्य को रोका जा रहा है। इन लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग को लेकर आज हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग राजभवन के समक्ष पहुंचे। साथ ही इस को लेकर आदिवासी समाज के लोगों ने एक ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। गौरतलब है कि जतरा मेला की पवित्र भूमि का इतिहास छठी शताब्दी पूर्व पुरानी है , मेला कार्तिक माह के पहली और दूसरी तिथि को हजारों वर्षों से चालीसों पाडहा के द्वारा जतरा शक्ति खूटा की पूजा – अर्चना कराई जाती रही है । यहां भारत देश के विभिन्न राज्यों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल , भूटान , बांग्लादेश अंडमान निकोबार से भी सैकड़ो की संख्या में सरना श्रद्धालु भक्तगण भाग लेते हैं। आदिवासी समाज का अगवाई करने पहुंचे रवि तिग्गा ने कहा है कि हम लोग आज हजारों की संख्या में अपने आस्था का केंद्र मुड़मा जतरा स्थल को बचाने आए हैं उपायुक्त महोदय ने आश्वासन दिया है कि इसे गंभीरता पूर्वक देखा जाएगा, हालांकि रवि तिग्गा ने चेतावनी भरे लफ्जों में कहा है कि अगर प्रशासन इसे नहीं रोकती है तो आदिवासी समाज से 50000 लोग इकट्ठा होकर इसका विरोध करेंगे, इस दौरान अगर कुछ विधि व्यवस्था की समस्या आती है तो इसके जिम्मेदार प्रशासन खुद होंगे।