झारखंड में UCMAS अबेकस का आगाज़, बच्चों के मस्तिष्क विकास को मिलेगी नई उड़ान
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जमशेदपुर:झारखंड में बच्चों के मानसिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध अबेकस प्रोग्राम UCMAS का 26 मार्च 2026 को आधिकारिक शुभारंभ किया गया। यह पहल राज्य के बच्चों में संज्ञानात्मक क्षमता, एकाग्रता और समग्र मस्तिष्क विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। वर्ष 1993 से भारत में सक्रिय UCMAS ने अब तक 2400 से अधिक केंद्रों के माध्यम से हजारों बच्चों के सीखने के तरीके में बदलाव लाया है।जमशेदपुर के एग्रीको स्थित इसके मुख्य कार्यालय का उद्घाटन बिजनेस हेड (इंडिया एवं नेपाल) सिम्प्लिसियो मेंजेस द्वारा किया गया, जिसमें क्वालिटी एवं ट्रेनिंग हेड भक्ति मोदी की उपस्थिति रही। यह कार्यालय झारखंड में UCMAS के संचालन और विस्तार का प्रमुख केंद्र होगा। राज्य में इस पहल का नेतृत्व सुरिंदर सैनी कर रही हैं, जिनका लक्ष्य हर बच्चे तक विश्वस्तरीय मानसिक विकास शिक्षा पहुंचाना है।मलेशिया में डॉ. डिनो वोंग द्वारा स्थापित UCMAS (यूनिवर्सल कॉन्सेप्ट ऑफ मेंटल अरिथमेटिक सिस्टम) एक वैज्ञानिक रूप से विकसित कार्यक्रम है, जो बच्चों के मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय कर उनकी स्मरण शक्ति, रचनात्मकता, विज़ुअलाइज़ेशन और समस्या समाधान क्षमता को मजबूत करता है। वर्तमान में यह कार्यक्रम 80 से अधिक देशों में संचालित हो रहा है, जहां 6000 से ज्यादा केंद्रों के माध्यम से 15 लाख से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

जमशेदपुर में लॉन्च के साथ ही UCMAS ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए 13 सक्रिय केंद्रों की शुरुआत की है और आने वाले समय में इसके विस्तार की योजना भी तैयार की जा रही है। यह बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अभिभावक अब पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के समग्र विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, UCMAS का पाठ्यक्रम वर्षों के शोध और परिणामों पर आधारित है, जो केवल गणितीय दक्षता ही नहीं बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, फोकस और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने पर भी जोर देता है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी प्रदान किया जाता है।UCMAS का झारखंड में विस्तार राज्य के शिक्षा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बच्चों को न केवल पढ़ाई में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी कौशल मिल सकेगा।
