आखिर बाबा रामदेव ने ऐसा क्या किया है की बार-बार माफी मांगने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट नहीं कर रहा है माफ़ ? जानें पूरा मामला..
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न्यूज़ टेल/डेस्क: (साहिल अस्थाना) बाबा रामदेव का विवादों से नाता टूटता दिख नहीं रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने ऐसा क्या किया है की वो बार बार माफी मांग रहे हैं पर उन्हें माफी मिल नहीं रही है। आखिर पूरे विश्व में योग को प्रसिद्धि दिलाने वाले बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से फटकार क्यों झेलनी पड़ रही है। आइए आपको पूरा मामला समझाते हैं।
ये है पूरा मामला
दरअसल 2 साल पहले 10 जुलाई 2022 को पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया। एडवर्टाइजमेंट में एलोपैथी पर गलतफहमियां फैलाने का आरोप लगाया गया।17 अगस्त 2022 को एक याचिका दायर की जाती है। इंडियन मेडीकल एसोसिएशन ने याचिका दायर कर कहा की, पतंजलि ने कोविड वैक्सीन और एलोपैथी के खिलाफ नेगेटिव प्रचार किया है और खुद की आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का झूठा दावा किया है। सुनवाई 2023 में हुई। 21 नवंबर 2023 को हुई सुनवाई में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा था- पतंजलि को सभी भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा। कोर्ट ऐसे किसी भी उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लेगा और हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगा सकता है। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी पतंजलि ने विज्ञापन जारी किए। आईएमए ने दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में प्रिंट मीडिया में जारी किए गए विज्ञापनों को कोर्ट के सामने पेश किया। इसके अलावा 22 नवंबर 2023 को पतंजलि के CEO बालकृष्ण के साथ योग गुरु रामदेव की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में भी बताया। पतंजलि ने इन विज्ञापनों में मधुमेह और अस्थमा को ‘पूरी तरह से ठीक’ करने का दावा किया था।
सुनवाई के प्रमुख बात
पतंजलि भ्रामक विज्ञापन केस में 16 अप्रैल 2024 को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच के सामने बाबा रामदेव और बालकृष्ण तीसरी बार पेश हुए। बाबा रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- हम कोर्ट से एक बार फिर माफी मांगते हैं। हमें पछतावा है। हम जनता के बीच माफी मांगने को तैयार हैं। कोर्ट ने कहा- हम बाबा रामदेव को सुनना चाहते हैं। जस्टिस कोहली ने बाबा रामदेव से कहा कहा- आपने योग के लिए बहुत कुछ किया है। आपका सम्मान है, लेकिन आपने ये जो स्टेटमेंट दिया है- परम आदरणीय जज साहिब महोदया। अनकंडीशनली जो भी हमसे हुई हम अपोलोजाइज किए हैं। जिस चीज का आप प्रचार कर रहे हैं, हमारी संस्कृति में ऐसी कई चीजें हैं। लोग सिर्फ ऐलोपैथी नहीं, घरेलू पद्धतियां भी इस्तेमाल कर रहे हैं। नानी के नुस्खे भी। आप अपनी पद्धतियों के लिए दूसरों को गलत क्यों बता रहे हैं। रामदेव ने कहा- किसी को भी गलत बताने का हमारा कोई इरादा नहीं था। आयुर्वेद को रिसर्च बेस्ड एविडेंस के लिए तथ्य पर लाने के लिए पतंजलि ने प्रयास किए हैं। आगे से इसके प्रति जागरूक रहूंगा। कार्य के उत्साह में ऐसा हो गया। इस पर कोर्ट ने कहा- आप इतने मासूम नहीं हैं। ऐसा लग नहीं रहा है कि कोई हृदय परिवर्तन हुआ हो। अभी भी आप अपनी बात पर अड़े हैं। हम इस मामले को 23 अप्रैल को देखेंगे। कोर्ट ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को आदेश देते हुए कहा आप दोनों उस दिन भी कोर्ट में मौजूद रहें।
पहले भी मांग चुके हैं माफ़ी
आपको बता दें कि बाबा रामदेव की तरफ से 2 अप्रैल को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच में माफी नामा दिया गया था। बेंच ने पतंजलि को फटकार लगाया और कहा की माफी नामा सिर्फ खाना पूर्ति के लिए है। आपके अंदर माफी का कोई भाव दिख नहीं रहा है। उसके बाद 10 अप्रैल को फिर से तिथि दी गई। 10 अप्रैल को सुनवाई होनी थी उसके एक दिन पहले बाबा रामदेव ने नया एफिडेविट फाइल किया इसमें पतंजलि की तरफ से उन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि इस गलती पर उन्हें खेद है दोबारा ऐसा नहीं होगा।
विवादों से पुराना नाता
बाबा रामदेव और पतंजलि का यह विवाद कोई नया नहीं है। इसके पहले भी कई विवाद हो चुके हैं, या यूं कहें बाबा रामदेव का विवादों से पुराना नाता रहा है। कोरोना के अलावा रामदेव बाबा कई बार योग और पतंजलि के प्रोडक्ट्स से कैंसर, एड्स और होमोसेक्सुअलिटी तक ठीक करने के दावे को लेकर विवादों में रहे हैं। 2018 में भी FSSAI ने पतंजलि को मेडिसिनल प्रोडक्ट गिलोय घनवटी पर एक महीने आगे की मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखने के लिए फटकार लगाई थी। 2015 में कंपनी ने इंस्टेंट आटा नूडल्स लॉन्च करने से पहले फूड सेफ्टी एंड रेगुलेरिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से लाइसेंस नहीं लिया था। इसके बाद पतंजलि को फूड सेफ्टी के नियम तोड़ने के लिए लीगल नोटिस का सामना करना पड़ा था। 2015 में कैन्टीन स्टोर्स डिपार्टमेंट ने पतंजलि के आंवला जूस को पीने के लिए अनफिट बताया था। इसके बाद CSD ने अपने सारे स्टोर्स से आंवला जूस हटा दिया था। 2015 में ही हरिद्वार में लोगों ने पतंजलि घी में फंगस और अशुद्धियां मिलने की शिकायत की थी।