आजादी के वर्षों बाद भी रास्ते की उम्मीद में एक गांव
1 min readगढ़वा : देश जहां चांद पर उतरने की कोशिश कर रहा है, वहीं इस बदलते परिवेश में भी एक ऐसा गांव जो आजादी के इतने वर्ष बीतने के बाद भी रास्ता की राह देख रहा है। लेकिन दुर्भाग्य है इस गांव की जहाँ विकाश के दम भरने वाले चाहे वह सरकार में लोग हों या प्रशासन आज तक इस गांव को एक (राह)यानी रास्ता नही दे पाई गढ़वा जिला मुख्यालय से सटे यह है बेलचम्पा पंचायत का अखहड़वा टोला। वर्ष 1995 में तत्कालीन बिहार सरकार ने इस गांव को विस्थापन नीति के तहत बसाया था , 50 परिवारों को एक-एक एकड़ भूमि देकर विस्थापन नीति के तहत बसाया गया था लेकिन दुर्भाग्य है इस गांव का की 25 वर्ष बीतने के बाद भी इस गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नही मिल पाई। गांव से सटे एक छोटी नदी है नाम है अदरा नदी। बारिस के दिनों में जब अदरा उफान में आती है तो क्या मजाल किसी की कोई इस नदी में पांव भी डाल सके। इस नदी के कारण यह गांव पूरी तरह से जिला मुख्यालय से कटा हुआ है , और समय मे तो नदी पार कर लोग गांव से निकलते जरूर है लेकिन बरसात के दिनों में गांव से निकलना दूभर हो जाता है। यहां तक कि स्कूल जाने वाले बच्चें हों या बीमारी से ग्रसित लोग या काम धंधे वाले इन सभी का निकलना मुश्किल होता है, इस गांव में शादी ब्याह भी उस समय मे होता है जब किसानों की सभी फसलें कट जाती है और खेत खाली हो जाते है। अन्य समय मे ये लोग चाहकर भी शादी ब्याह नही कर सकते वजह है रास्ता का नही होना। आज इस गांव की आबादी लगभग तीन से चार सौ की है और इन सभी का एक हीं मांग है सड़क और पुल इसके लिए ये लोग अधिकारी हों या नेता सभी के पास अपनी अर्जी लगा चुके है लेकिन मिला तो सिर्फ आश्वासन इसके सिवा कुछ नही। इस गांव की समस्या से जब हमने जिला प्रशासन को अवगत कराया तो जिले के उप विकास आयुक्त ने जानकारी मिलते ही संवेदनशील दिखे इस मामले पर तुरन्त संज्ञान लिया और विशेष प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता को 24 घँटे के अंदर पूल और सड़क बनाने से पहले निरीक्षण कर रिपोर्ट करने का पत्र भी जारी कर दिया। उन्होंने कहा मामला संज्ञान में आया है और इसपर त्वरित कार्य किये जायेंगे।