Delhi : तिहाड़ प्रशासन की पहल, विचाराधीन कैदी भी जेल में करेंगे काम
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न्यूज़ डेस्क : तिहाड़ में अब विचाराधीन कैदी भी काम करेंगे। जेल प्रशासन विचाराधीन कैदियों को हुनरमंद बनाने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद विचाराधीन कैदियों को अपराध से दूर करना और उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाना है।
हुनर सिखाने पर विचार
तिहाड़ जेल में बंद 80 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं। इन कैदियों को जेल प्रशासन कोई न कोई हुनर सिखाने पर विचार कर रहा है। ताकि जेल से निकलने के बाद यह कैदी अपराध से दूर रहकर अपना कोई काम कर खुद और परिवार का जीविकोपार्जन कर सकें।
कौशल विकास योजना के तहत काम सिखाया जाएगा
कौशल विकास योजना के तहत कैदियों को काम सिखाया जाएगा। कई स्वयं सेवी संस्थाएं तिहाड़ जेल से जुड़ी हैं और वे कैदियों को कई तरह के प्रशिक्षण देती हैं। उन्हें तीन माह का प्रमाण पत्र भी देती हैं।
80 फीसदी कैदी विचाराधीन
तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल में अभी क्षमता से दोगुने करीब 20 हजार कैदी बंद हैं। इसमें से 80 फीसदी कैदी विचाराधीन हैं। जो जेल में आते हैं और कुछ दिन बाद जमानत होने पर जेल से निकल जाते हैं।
इनके पास किसी काम का हुनर नहीं
बाहर जाकर फिर से आपराधिक वारदात को अंजाम देने लगते हैं। इनसे बातचीत करने पर पता चला कि इनके पास किसी काम का हुनर नहीं है। इस वजह से जेल से निकलने के बाद उनके पास आपराधिक वारदात को अंजाम देने के अलावा कोई चारा नहीं होता है।
कैदियों को भी हुनरमंद बनाने की पहल
जेल प्रशासन ने इन कैदियों को भी हुनरमंद बनाने की पहल शुरू कर दी है। जेल अधिकारियों का कहना है कि अब तक सजायाफ्ता कैदी ही जेल में काम सीखकर जेल की फैक्टरी में काम करते थे, लेकिन अब विचाराधीन कैदी भी अपना मनपसंद काम सीख सकेंगे। ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वह अपना कोई कामकाज शुरू कर सकें और अपराध की तरफ जाने से बचे।
कैदी भी मनपसंद काम सीख सकेंगे
तिहाड़ जेल में केक बनाने से लेकर बिस्कुट, एलईडी बल्ब, अचार, फर्नीचर, कंबल से लेकर डिजाइनर कपड़े तक बनाने की अलग-अलग यूनिट हैं। जेल परिसर के 400 एकड़ में अलग-अलग यूनिट हैं, जिसमें कैदी काम करते हैं। अब इन इकाइयों में विचाराधीन कैदी भी मनपसंद काम सीख सकेंगे।